श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर भक्तिमय हुआ उत्तर प्रदेश, मथुरा से काशी तक मंदिरों में गूंजा जय श्रीकृष्ण

उत्तर प्रदेश में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। मथुरा, लखनऊ, काशी और कानपुर समेत प्रदेश के अलग-अलग शहरों में मंदिरों को भव्य रूप से सजाया गया है। भक्त भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का इंतजार कर रहे हैं और मंदिरों में विशेष पूजा, भजन-कीर्तन और धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर भक्तिमय हुआ उत्तर प्रदेश, मथुरा से काशी तक मंदिरों में गूंजा जय श्रीकृष्ण
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर भक्तिमय हुआ उत्तर प्रदेश, मथुरा से काशी तक मंदिरों में गूंजा जय श्रीकृष्ण

लखनऊ। भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव का पर्व श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पूरे उत्तर प्रदेश में श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। प्रदेश के अलग-अलग शहरों में मंदिरों को रंग-बिरंगी रोशनी, फूलों और आकर्षक सजावट से सजाया गया है। शाम होते ही मंदिरों और धार्मिक स्थलों पर भक्तों की भीड़ बढ़ने लगी है और वातावरण भजन-कीर्तन से भक्तिमय हो गया है।

जन्माष्टमी के मौके पर घरों में भी विशेष तैयारियां की गई हैं। लोगों ने बाल गोपाल के लिए सुंदर झूले सजाए हैं। कई घरों में भगवान श्रीकृष्ण की बाल स्वरूप प्रतिमा को नए वस्त्र और आभूषण पहनाकर विशेष पूजा की जा रही है।

मथुरा में कृष्ण जन्मोत्सव का खास उत्साह

भगवान श्रीकृष्ण की जन्मभूमि मथुरा में जन्माष्टमी का उत्साह सबसे अलग नजर आ रहा है। मंदिरों और प्रमुख धार्मिक स्थलों पर विशेष सजावट की गई है। श्रद्धालु दूर-दूर से कृष्ण जन्मोत्सव में शामिल होने के लिए पहुंच रहे हैं।

मंदिरों में भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप की झांकियां सजाई गई हैं। आधी रात को भगवान के जन्म के समय विशेष पूजा और आरती का आयोजन किया जाएगा। जैसे ही जन्म का समय नजदीक आएगा, मंदिर परिसर में जयकारों की गूंज और तेज होने की उम्मीद है।

लखनऊ में मंदिरों में विशेष आयोजन

राजधानी लखनऊ में भी जन्माष्टमी को लेकर लोगों में खास उत्साह है। शहर के विभिन्न मंदिरों में भगवान श्रीकृष्ण की झांकियां सजाई गई हैं। कई स्थानों पर भजन-कीर्तन और धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।

बच्चों में भी जन्माष्टमी को लेकर खास उत्साह देखने को मिल रहा है। कई स्कूलों और घरों में बच्चों को कृष्ण और राधा के रूप में सजाया गया है।

काशी में भी भक्ति का माहौल

धर्म और आस्था की नगरी काशी में जन्माष्टमी के अवसर पर मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना की जा रही है। भगवान श्रीकृष्ण की आराधना के साथ भजन और कीर्तन का आयोजन हो रहा है।

काशी की धार्मिक परंपरा और जन्माष्टमी के उत्सव का मेल शहर के वातावरण को और भी खास बना रहा है। श्रद्धालु भगवान कृष्ण के जन्म का इंतजार कर रहे हैं और मंदिरों में दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं।

कानपुर में भी कृष्ण भक्ति में डूबे श्रद्धालु

कानपुर में भी जन्माष्टमी को लेकर मंदिरों और घरों में विशेष तैयारियां की गई हैं। कई मंदिरों में आकर्षक झांकियां सजाई गई हैं। शाम से ही श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया है।

कई जगहों पर धार्मिक कार्यक्रमों के साथ बच्चों के लिए कृष्ण लीला और सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जा रहे हैं।

आधी रात को होगा भगवान कृष्ण का जन्म

हिंदू धर्म की मान्यता के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण का जन्म भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मध्यरात्रि में हुआ था। इसी कारण जन्माष्टमी की पूजा में मध्यरात्रि का समय विशेष महत्व रखता है।

भक्त रात तक उपवास और पूजा करते हैं और मध्यरात्रि में भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के बाद पूजा-अर्चना, आरती और प्रसाद वितरण किया जाता है।

घर-घर सजे बाल गोपाल

जन्माष्टमी का उत्सव केवल मंदिरों तक सीमित नहीं है। उत्तर प्रदेश के शहरों और गांवों में बड़ी संख्या में लोग अपने घरों में भी बाल गोपाल की पूजा कर रहे हैं।

कहीं छोटे-छोटे झूले सजाए गए हैं तो कहीं कृष्ण की बाल लीलाओं को दर्शाती झांकियां बनाई गई हैं। बाजारों में भी जन्माष्टमी से जुड़े सामान, पूजा सामग्री, सजावट और भगवान कृष्ण के वस्त्रों की मांग देखने को मिल रही है।

भक्ति और उत्सव का रंग

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी उत्तर प्रदेश में धार्मिक आस्था के साथ-साथ सांस्कृतिक उत्सव का भी रूप ले चुकी है। मंदिरों में भजन-कीर्तन, झांकियां और विशेष कार्यक्रम लोगों को आकर्षित कर रहे हैं।

मथुरा की कृष्ण जन्मभूमि से लेकर लखनऊ, काशी और कानपुर तक भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव को लेकर श्रद्धालुओं में उत्साह दिखाई दे रहा है। हर तरफ "जय श्रीकृष्ण" के जयकारे सुनाई दे रहे हैं और पूरा प्रदेश कृष्ण भक्ति के रंग में रंगा नजर आ रहा है।

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