नेपाल में बाढ़ से भारी तबाही, 1259 से ज्यादा मौतें और 5000 से अधिक लापता, भारत ने बढ़ाया मदद का हाथ
नेपाल में 26 अगस्त को आई भीषण बाढ़ और भूस्खलन ने भारी तबाही मचाई है। 3 सितंबर तक 1,259 लोगों की मौत और 5,083 लोगों के लापता होने की जानकारी सामने आई थी। राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है। भारत ने नेपाल को करीब 95 टन राहत सामग्री भेजने के साथ विशेषज्ञ बचाव दल भी तैनात किए हैं।
नेपाल में बाढ़ से भारी तबाही, 1259 से ज्यादा मौतें और 5000 से अधिक लापता, भारत ने बढ़ाया मदद का हाथ
नेपाल इस समय एक बड़े प्राकृतिक संकट से जूझ रहा है। 26 अगस्त को नेपाल-तिब्बत सीमा के पास बर्फ और चट्टानों के खिसकने के बाद आई भीषण बाढ़ ने कई इलाकों में भारी तबाही मचा दी। गांव, सड़कें, पुल और हाइड्रोपावर परियोजनाएं बुरी तरह प्रभावित हुई हैं।
3 सितंबर तक नेपाल के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक बाढ़ में 1,259 लोगों की मौत हुई थी, जबकि 5,083 लोग लापता बताए गए थे। इसके बाद भी बचाव अभियान जारी रहने के कारण आंकड़ों में बदलाव हुआ है। 4 सितंबर की रिपोर्टों में मृतकों की संख्या 1,294 से अधिक और लापता लोगों की संख्या 5,000 से ज्यादा बताई गई।
राहत और बचाव अभियान जारी
नेपाल की सेना और अन्य सुरक्षा एजेंसियां प्रभावित इलाकों में लगातार राहत और बचाव अभियान चला रही हैं। कई जगहों पर हालात बेहद चुनौतीपूर्ण बने हुए हैं। बाढ़ और मलबे के कारण हाइड्रोपावर परियोजनाओं की सुरंगों में फंसे लोगों को निकालना बचाव दलों के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है।
हालांकि राहत अभियान के दौरान उम्मीद की किरण भी दिखाई दी। त्रिशूली क्षेत्र की एक हाइड्रोपावर सुरंग से नौ दिन बाद दो लोगों को जिंदा बाहर निकाला गया।
भारत ने बढ़ाया मदद का हाथ
नेपाल की इस मुश्किल घड़ी में भारत ने राहत और बचाव अभियान में महत्वपूर्ण सहयोग दिया है। भारतीय विदेश मंत्रालय के मुताबिक भारत ने अब तक करीब 95 टन राहत सामग्री नेपाल भेजी है।
इसके अलावा भारत की ओर से 54 विशेषज्ञों को भी नेपाल भेजा गया है। इनमें टनल रेस्क्यू विशेषज्ञ, फोरेंसिक विशेषज्ञ और मेडिकल टीम के सदस्य शामिल हैं। भारतीय दल नेपाल की एजेंसियों के साथ मिलकर प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव कार्य कर रहे हैं।
275 भारतीय अब भी लापता
नेपाल में आई इस आपदा का असर भारतीय नागरिकों पर भी पड़ा है। विदेश मंत्रालय के अनुसार 275 भारतीय नागरिक अभी भी लापता हैं, जबकि 166 भारतीयों को सुरक्षित बचाया जा चुका है।
इसके अलावा चीन से 1,907 भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकालकर नेपाल पहुंचाया गया है। भारत सरकार ने कहा है कि वह नेपाल सरकार के साथ लगातार संपर्क में है और जरूरत के अनुसार आगे भी सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।
परिवारों में बढ़ती चिंता
हजारों लोगों के अब तक लापता होने के कारण प्रभावित परिवारों की चिंता बढ़ती जा रही है। कुछ इलाकों में लंबे समय से कोई जानकारी नहीं मिलने के बाद परिवारों ने अपने लापता परिजनों के लिए प्रतीकात्मक अंतिम संस्कार की रस्में भी शुरू कर दी हैं।
नेपाल के सामने बड़ी चुनौती
बाढ़ ने केवल जान-माल का नुकसान नहीं किया है, बल्कि नेपाल के सामने अब बड़े पैमाने पर पुनर्निर्माण की चुनौती भी खड़ी हो गई है। हजारों घर और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे क्षतिग्रस्त हुए हैं।
फिलहाल सबसे बड़ी प्राथमिकता लापता लोगों की तलाश, घायलों का इलाज और प्रभावित परिवारों तक राहत पहुंचाना है। भारत समेत कई देशों की टीमें नेपाल के बचाव अभियान में सहयोग कर रही हैं।
नेपाल की यह आपदा दक्षिण एशिया के लिए एक बड़ी मानवीय त्रासदी बन चुकी है। बचाव दल अभी भी मलबे और सुरंगों में जिंदगी की तलाश कर रहे हैं, जबकि हजारों परिवार अपने लापता परिजनों की वापसी की उम्मीद लगाए बैठे हैं।
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