अब वर्क फ्रॉम होम नहीं, पहाड़ों से काम करने का बढ़ रहा है नया ट्रेंड
कोरोना महामारी के बाद दुनिया में काम करने का तरीका तेजी से बदला। ऑफिस जाने की जगह घर से काम करना यानी Work From Home लंबे समय तक नई कार्यसंस्कृति का हिस्सा बना रहा। लेकिन अब रिमोट वर्क की यही संस्कृति एक नए ट्रेंड को जन्म दे रही है, जिसे Work From The Hills या Workation के नाम से जाना जा रहा है।
अब कई ऐसे लोग हैं जो शहरों की भागदौड़, ट्रैफिक और लगातार बढ़ते तनाव से दूर कुछ समय पहाड़ों में रहकर अपना काम करना पसंद कर रहे हैं। उनके लिए पहाड़ केवल घूमने की जगह नहीं रह गए हैं, बल्कि काम करने और रहने का नया विकल्प भी बन रहे हैं।
पहाड़ बन रहे हैं नया वर्कस्पेस
कल्पना कीजिए कि सुबह ऑफिस जाने के लिए ट्रैफिक में फंसने के बजाय आपकी शुरुआत पहाड़ों के शांत वातावरण से हो। खिड़की के बाहर हरियाली हो, दूर बादल दिखाई दें और कुछ कदम की दूरी पर हिमालय का नजारा हो। इसके बाद आप अपना लैपटॉप खोलकर वही काम करें, जो आप किसी बड़े शहर के ऑफिस या घर से करते हैं।
यही विचार Digital Nomad संस्कृति को बढ़ावा दे रहा है।
Digital Nomad ऐसे प्रोफेशनल होते हैं जो इंटरनेट और डिजिटल तकनीक की मदद से किसी एक पारंपरिक ऑफिस से बंधे बिना अलग-अलग जगहों से अपना काम कर सकते हैं। इस बदलाव ने पर्यटन और रोजगार के बीच एक नया संबंध भी तैयार किया है।
सिक्किम का याकतेन बना खास उदाहरण
इस बदलाव का एक दिलचस्प उदाहरण सिक्किम के पाक्योंग जिले का याकतेन गांव है। जुलाई 2025 में यहां Nomad Sikkim पहल के तहत भारत के पहले Digital Nomad Village का उद्घाटन किया गया।
इस पहल को पाक्योंग जिला प्रशासन और Sarvahitey NGO के सहयोग से विकसित किया गया है। इसका उद्देश्य ऐसे प्रोफेशनल्स को पहाड़ी गांव में काम करने का अवसर देना है, जो रिमोट वर्क के साथ शांत और प्राकृतिक वातावरण में रहना चाहते हैं।
याकतेन में रिमोट वर्क करने वालों की जरूरत को ध्यान में रखते हुए हाई-स्पीड Wi-Fi, बिजली की व्यवस्था और वर्क-फ्रेंडली होमस्टे जैसी सुविधाएं विकसित की गई हैं। स्थानीय परिवहन से जोड़ने की व्यवस्था भी इस मॉडल का हिस्सा है।
गांव में रहिए, काम भी कीजिए
याकतेन मॉडल की खासियत सिर्फ इंटरनेट या रहने की सुविधा नहीं है। इसका उद्देश्य डिजिटल प्रोफेशनल्स को स्थानीय समुदाय के करीब लाना भी है।
यहां आने वाला व्यक्ति किसी बड़े होटल या कॉरपोरेट ऑफिस में रहने के बजाय स्थानीय परिवारों द्वारा संचालित होमस्टे में रह सकता है। इस तरह उसके खर्च का एक हिस्सा सीधे स्थानीय अर्थव्यवस्था तक पहुंचता है।
यानी एक Digital Nomad का यहां रहना केवल उसके अपने Work From The Hills अनुभव तक सीमित नहीं रहता, बल्कि स्थानीय परिवारों, होमस्टे संचालकों, टैक्सी ड्राइवरों और छोटे कारोबारियों के लिए भी आय का अवसर पैदा कर सकता है।
पर्यटन को 12 महीने चलाने की कोशिश
पहाड़ी इलाकों में पर्यटन अक्सर मौसम और छुट्टियों पर निर्भर रहता है। कुछ महीनों में पर्यटकों की संख्या काफी बढ़ जाती है, जबकि बाकी समय कारोबार धीमा हो जाता है।
Digital Nomad मॉडल इस समस्या को कम करने का एक नया रास्ता पेश करता है।
रिमोट वर्क करने वाले लोग केवल छुट्टियों में ही यात्रा करने के लिए मजबूर नहीं होते। वे कई सप्ताह या महीने तक किसी स्थान पर रह सकते हैं। यही कारण है कि याकतेन जैसी पहल का उद्देश्य पर्यटन को केवल सीजन तक सीमित रखने के बजाय पूरे साल स्थानीय अर्थव्यवस्था से जोड़ना है। पाक्योंग प्रशासन ने भी इस मॉडल को मौसमी पर्यटन से आगे बढ़कर स्थानीय आय और रोजगार के अवसर पैदा करने वाली पहल के रूप में बताया है।
Work From The Hills क्यों पसंद कर रहे हैं लोग?
इसके पीछे कई कारण हैं।
शहरों में लगातार बढ़ता ट्रैफिक, शोर, प्रदूषण और काम का दबाव लोगों को वैकल्पिक जीवनशैली की ओर आकर्षित कर रहा है। दूसरी तरफ पहाड़ी इलाकों में प्राकृतिक वातावरण, अपेक्षाकृत शांत जीवन और रोजमर्रा की भागदौड़ से दूरी लोगों को मानसिक रूप से बेहतर अनुभव दे सकती है।
इसके अलावा Remote Work ने यह संभव बना दिया है कि किसी व्यक्ति को हर दिन अपने ऑफिस के शहर में मौजूद रहना जरूरी न हो।
अगर काम के लिए सिर्फ एक अच्छा इंटरनेट कनेक्शन और लैपटॉप चाहिए, तो फिर सवाल यह भी हो सकता है कि काम शहर से ही क्यों किया जाए?
यहीं से Work From The Hills की अवधारणा मजबूत होती है।
सिर्फ घूमना नहीं, स्थानीय जीवन को समझना भी
Workation को केवल पर्यटन के एक नए रूप के तौर पर देखना इसकी पूरी तस्वीर नहीं बताता।
अगर कोई व्यक्ति किसी पहाड़ी गांव में कुछ सप्ताह रहता है, स्थानीय परिवार के साथ रहता है, स्थानीय भोजन करता है और आसपास के लोगों से जुड़ता है, तो वह उस क्षेत्र की संस्कृति और जीवनशैली को भी करीब से समझता है।
याकतेन जैसे मॉडल में यही Community Based Tourism की भावना दिखाई देती है। इसका उद्देश्य यह है कि पर्यटन से होने वाला आर्थिक लाभ केवल बड़े होटल या बाहरी कारोबार तक सीमित न रहे, बल्कि स्थानीय समुदाय को भी उसका हिस्सा मिले।
सामने हैं कुछ चुनौतियां भी
हालांकि Work From The Hills का विचार आकर्षक है, लेकिन इसे सफल बनाने के लिए कई चुनौतियों पर ध्यान देना जरूरी है।
सबसे पहली जरूरत मजबूत इंटरनेट कनेक्टिविटी की है। Remote Worker के लिए इंटरनेट केवल सुविधा नहीं बल्कि काम का आधार है। इसके साथ बिजली की विश्वसनीय व्यवस्था, स्वास्थ्य सेवाएं, सड़क संपर्क और आपातकालीन सुविधाएं भी जरूरी हैं।
दूसरी चुनौती पर्यावरण की है। अगर किसी शांत पहाड़ी गांव में अचानक बड़ी संख्या में पर्यटक और Digital Nomads आने लगते हैं, तो इससे कचरा, पानी और प्राकृतिक संसाधनों पर दबाव बढ़ सकता है।
इसीलिए ऐसे मॉडल की सफलता केवल ज्यादा पर्यटकों की संख्या से नहीं, बल्कि इस बात से तय होगी कि स्थानीय पर्यावरण और संस्कृति को कितना सुरक्षित रखा जाता है।
आने वाले समय में बढ़ सकता है Workation का बाजार
Work From Home ने लोगों को यह दिखाया कि काम करने के लिए हमेशा पारंपरिक ऑफिस जरूरी नहीं है। अब Work From The Hills यह सवाल सामने रख रहा है कि काम करने के लिए पारंपरिक शहर भी हमेशा जरूरी नहीं है।
सिक्किम का याकतेन इस बदलाव का एक शुरुआती उदाहरण है। अगर ऐसे मॉडल सफल होते हैं, तो आने वाले समय में देश के दूसरे पहाड़ी और ग्रामीण इलाकों में भी Digital Nomad Villages और Workation destinations विकसित किए जा सकते हैं।
हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, सिक्किम और पूर्वोत्तर के कई इलाकों में प्राकृतिक सुंदरता के साथ स्थानीय समुदायों को जोड़कर इस क्षेत्र में बड़ी संभावनाएं पैदा की जा सकती हैं।
पहाड़ों में काम, गांवों में रोजगार
Work From The Hills का सबसे महत्वपूर्ण पहलू शायद यही है कि यह सिर्फ शहर से पहाड़ की ओर जाने का ट्रेंड नहीं है।
सही तरीके से विकसित किया जाए तो यह Digital Connectivity + Tourism + Local Employment + Rural Development को एक साथ जोड़ने वाला मॉडल बन सकता है।
कल तक जिस पहाड़ी गांव को लोग सिर्फ घूमने की जगह मानते थे, वहां आने वाले समय में कोई व्यक्ति एक महीने रहकर अपना ऑफिस भी चला सकता है।
शायद यही बदलती कार्यसंस्कृति की अगली तस्वीर है।
अब सवाल सिर्फ यह नहीं है कि आप कहां रहते हैं और कहां काम करते हैं। सवाल यह है कि क्या आप ऐसा स्थान चुन सकते हैं, जहां काम के साथ जिंदगी को भी थोड़ा बेहतर तरीके से जिया जा सके।
और शायद इसी सोच से Work From Home से Work From The Hills तक का सफर शुरू हो चुका है।